इस्लाम में सुसाइड करना कैसा है ?
अस्सलामु अलैकुम व रहमतुल्लाहि व बरकातुहू !
प्यारे दोस्तों आपका Islamic Trainer के इस पोस्ट में इस्तकबाल है । आज के इस पोस्ट में हम संक्षिप्त रूप से इस टॉपिक पर बात करने वाले हैं कि उम्र के मुताल्लिक हुजूर (स.अ.व) का फरमान क्या है ? इसके साथ ही हम आपको यह भी बताएंगे कि इस्लाम में सुसाइड करना कैसा है ?
तो चलिए इस पोस्ट को शुरू करते हैं ।
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दोस्तों सबसे पहली बात तो ये है , कि आपके साथ चाहे कितनी बड़ी मुसीबत क्यों न आ जाए लेकिन मौत की दुआ या तमन्ना करना बिल्कुल गलत है । हमारा मज़हब इस्लाम हमें इस बात की बिल्कुल भी इज़ाजत नहीं देता । फिर भी हम अपने आस पास के लोगों पर ही नज़र डालें तो पता ये चलेगा कि लोग छोटी-छोटी मुसीबतों पर भी मौत की तमन्ना करने लगते हैं । यही नहीं , हमारे यहां तो कई लोग ऐसे भी हैं जो खुदा तआला को ही कोसने लगते हैं । और यह कहते हैं कि हमें ऐसी मुसीबत क्यों दी ??
अल्लाह तआला मुसीबत किसे देता है और क्यों ??
दोस्तों , अगर हम अपने आस पास नजर दौड़ाएं तो हमे यह पता चलेगा कि हर आदमी किसी न किसी परेशानी में मुब्तला है । किसी की परेशानी कम है , तो किसी की ज्यादा ।
ऐसे में हमें शब्र से काम लेना चाहिए । अल्लाह तआला इन मुसीबतों और परेशानियों के ज़रिये ही अपने महबूब बन्दों को आजमाता है , और देखता है कि मेरा ये बन्दा परेशानियों के बावजूद भी मेरी इबादत करता है या नहीं ? । अल्लाह तआला मुसीबतें ज्यादातर अपने महबूब बन्दों पर ही नाज़िल करता है ताकि उनके शब्र का इम्तिहान लिया जा सके ।
तो फिर हम क्या करें ?
मेरे अज़ीज़ दोस्तों ! इस्लाम में सुसाईड करना हराम है । इसीलिए हमारे सामने कितनी भी बड़ी परेशानी या दुख-तकलीफ क्यों न हो लेकिन हमें न ही मौत की तमन्ना करनी चाहिए और न ही अपनी जान देनी चाहिए । क्योंकि हमारे जिस्म के अंदर जो जान है वो हमारी खुद की नहीं है , बल्कि वो खुदा की दी हुई नेअमत है वो जब चाहेगा हमारी जान निकालेगा । फिर हमें अपनी जान देने का अख्तियार किसने दिया ???
दोस्तों अब बात करते हैं उम्र की फजीलत के बारे में :-
दोस्तों उम्र के बारे में प्यारे नबी हजरत मुहम्मद मुस्तफा (स.अ.व) ने बहुत सी हदीसें बयान की हैं । अगर आप उन्हें जानना चाहते हैं तो हमारी ये पोस्ट पढ़ें ।
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खुदा हाफिज़ !
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